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पुनरुत्थान विधापीठ 

शुद्ध भारतीय स्वरूप का एक सर्वसमावेशक विधापीठ

भारत के ज्ञान के मूल स्त्रोत समान वेदों का युरोपीय भाषा मेँ अनुवाद करने वाले पंडित मैक्समूलर ने अपने मित्र को भेजे एक पत्र मेँ लिखा था........... " India has been conquered once, but she should be conquered again. And the second Conquest should be the conquest through education.(October 1868 )" अर्थात् भारत एक बार जीता गया हे, परंतु वह (सर्वार्थ में) दूसरी बार जीता जाना चाहीये, और वह दूसरी विजय शिक्षा के माध्यम से होनी चाहिये| और मैकोले प्रणीत शिक्षा के माध्यम से भारत जीता गया |मैक्समूलर के इस कथन का उतर देना अभी बाकी है|

यह उतर होगा...

" भारतमाता एक बार मुक्त हुई है, परंतु उसे (सर्वार्थ में) दूसरी बार मुक्त करने की आवश्यकता है| यह दूसरी मुक्ती भी होगी शिक्षा के माध्यम से| "

" यह उतर देगा पुनरुत्थान विधापीठ| "भारत की शिक्षा परंपरा विश्व मै प्राचीनतम और श्रेष्ठतम रही है| गुरुकुल, आश्रम विधापीठ एवं छोटे छोटे प्राथमिक विधालयों मै जीवन का सर्वतोमुखी विकास होता था और व्यक्ति का तथा राष्ट्र का जीवन सुख, समृध्धि, संस्कार एवं ज्ञान से परिपूर्ण होता था| विश्व भी उससे लाभान्वित होता था| इन विधाकेन्द्रो का आदर्श लेकर पुनरुत्थान विधापीठ कार्यरत होगा|